क्या आप Overthink करते हैं? Here is a beautiful solution
क्या आप Overthink करते हैं? यहाँ है एक सुंदर समाधान
मन से लड़ने की नहीं, उसे सुरक्षित महसूस कराने की कहानी
Overthinking कोई बीमारी नहीं है।
यह कोई कमज़ोरी नहीं है।
और यह बिल्कुल भी शर्म की बात नहीं है।
ज़्यादातर Overthink करने वाले लोग संवेदनशील, समझदार, ज़िम्मेदार, गहराई से महसूस करने वाले और दूसरों की परवाह करने वाले होते हैं।
समस्या यह नहीं है कि आपका मन सोचता है —
समस्या यह है कि उसे आराम करना नहीं आता।
यह ब्लॉग आपको “सोचना बंद करो” नहीं सिखाएगा।
यह आपको अपने मन से दोस्ती करना सिखाएगा।
Overthinking असल में क्या है?
Overthinking का मतलब ज़्यादा सोचना नहीं होता।
Overthinking का मतलब होता है:
एक ही बात को बार-बार चबाना
भविष्य के डर में फँस जाना
बीते हुए पलों को दोबारा जीना
“अगर ऐसा हो गया तो?” में खो जाना
असल में Overthinking डर की भाषा है।
मन आपको परेशान करने नहीं आया —
वह आपको बचाने आया है।
समझदार लोग ज़्यादा Overthink क्यों करते हैं?
क्योंकि वे परिणामों के बारे में सोचते हैं, उन्हें दूसरों की भावनाओं की चिंता होती है
वे गलती नहीं करना चाहते, वे असुरक्षा जल्दी महसूस कर लेते हैं
यह बुद्धिमत्ता है — लेकिन बिना संतुलन के, यही बोझ बन जाती है।
Overthinking के नीचे छुपा सच
हर Overthinking के नीचे एक सवाल छुपा होता है:
“क्या मैं सुरक्षित हूँ?”
क्या मैं भावनात्मक रूप से सुरक्षित हूँ?
क्या मैं गलत हो गया तो स्वीकार किया जाऊँगा?
क्या मैं काबू में हूँ?
जब मन को सुरक्षा नहीं मिलती —
वह सोचना शुरू कर देता है।
“सोचना बंद करो” क्यों काम नहीं करता?
क्योंकि मन कोई मशीन नहीं है।
जब आप कहते हैं:
“सोचना बंद करो”
मन सुनता है:
“खतरा है — Alert रहो!”
और वह और तेज़ दौड़ने लगता है।
सुंदर समाधान: Control नहीं, Safety
Overthinking को Control करने की ज़रूरत नहीं है।
उसे सुरक्षा चाहिए।
जब शरीर सुरक्षित महसूस करता है —
मन अपने आप शांत हो जाता है।
यही असली समाधान है।
Nervous System: असली खिलाड़ी
आपका मन नहीं,
आपका Nervous System Overthinking चला रहा होता है।
Fight–Flight मोड में:
विचार तेज़ होते हैं
डर बढ़ता है
कल्पनाएँ बिगड़ती हैं
Calm Mode में
स्पष्टता आती है
समाधान दिखते हैं
मन हल्का होता है
पहला Practical अभ्यास (अभी करें)
अपना हाथ सीने पर रखें।
धीरे से कहें:
“अभी मैं सुरक्षित हूँ।”
तीन बार।
यह साधारण लगता है,
लेकिन Nervous System इसे गंभीरता से लेता है।
एक ज़रूरी सच्चाई
आप Overthinker नहीं हैं।
आप एक संवेदनशील इंसान हैं
जिसे सुरक्षा नहीं मिली।
और यह बदला जा सकता है।
आगे क्या?
Part 2 में हम बात करेंगे:
बचपन की Conditioning
रिश्तों में Overthinking
Emotional Safety कैसे बनती है
जब भी आप कहें — मैं आगे लिखूँगा।
क्योंकि आपका मन दुश्मन नहीं है।
वह बस थका हुआ है।
एक भावनात्मक संवाद (Emotionally)
अगर कोई आपसे पूछे —
“तुम इतना सोचते क्यों हो?”
तो सच यह है कि:
आप ज़्यादा सोचते नहीं,
आप ज़्यादा महसूस करते हैं।
आप हर शब्द के पीछे का मतलब ढूँढते हैं,
हर ख़ामोशी को समझने की कोशिश करते हैं,
हर रिश्ते को बचाने का बोझ अपने दिल पर उठा लेते हैं।
क्योंकि कभी न कभी…
आपने सीखा था कि अगर आप सतर्क नहीं रहेंगे,
तो चोट लग सकती है।
इसलिए आपका मन पहरेदार बन गया।
दिन-रात।
लेकिन पहरेदार भी थक जाता है।
आज अगर आपका मन शोर कर रहा है,
तो उसे चुप कराने की नहीं —
उसे गले लगाने की ज़रूरत है।
धीरे से कहिए
“अब मैं यहाँ हूँ।
अब तुम्हें अकेले सब संभालने की ज़रूरत नहीं।”
यकीन मानिए,
जिस दिन आपका मन यह बात मान लेगा —
उस दिन Overthinking पिघलने लगेगी।
यह लड़ाई नहीं है।
यह घर लौटने की प्रक्रिया है।
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✨ Healing दूसरों को छोड़ना नहीं—
खुद के पास लौटना है।



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