स्त्री अगर सब कुछ देकर भी खाली रह जाए… तो ये करना ज़रूरी है!
एक स्त्री का जीवन प्रेम, समर्पण, त्याग और सहनशीलता की मिसाल होता है। वह बेटी होती है, बहन होती है, पत्नी होती है, माँ होती है – हर भूमिका में वह खुद को पूरी तरह समर्पित कर देती है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि जब वह हर किसी के लिए सब कुछ करती है, अपने हिस्से की खुशियाँ लुटा देती है, तब भी अंत में वो अंदर से खाली महसूस करती है। क्यों?
सब कुछ देने के बाद भी खाली क्यों?
स्त्री का दिल बड़ा होता है – वह अपने बच्चों की चिंता करती है, पति की देखभाल करती है, अपने माता-पिता और ससुराल दोनों के लिए खुद को झोंक देती है। लेकिन जब उसे अपने ही जीवन में अपने लिए समय या जगह नहीं मिलती, तब धीरे-धीरे वह मानसिक रूप से थकने लगती है।
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भावनात्मक थकावट: दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूँढना एक सुंदर बात है, लेकिन लगातार ऐसा करते-करते वह भूल जाती है कि उसे खुद की भी ज़रूरतें हैं।
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अपेक्षाओं का बोझ: परिवार, समाज और रिश्तों से बंधी स्त्री पर बहुत सी उम्मीदें लादी जाती हैं। जब वह उन्हें पूरा नहीं कर पाती, तो खुद को दोषी मानने लगती है।
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स्वयं की उपेक्षा: अपने आप को समय न देना, अपने स्वास्थ्य और इच्छाओं की अनदेखी करना भी इस खालीपन का कारण है।
अगर आप भी इस स्थिति में हैं, तो ये करना ज़रूरी है:
खुद से जुड़ना शुरू करें
हर दिन कुछ समय सिर्फ खुद के लिए निकालें। सुबह की 10 मिनट की चाय या रात को 15 मिनट की डायरी लिखने की आदत शुरू करें। यह आपको आपके भीतर की आवाज़ से जोड़ती है।
ना कहना सीखें
हर काम और हर ज़िम्मेदारी उठाना ज़रूरी नहीं। जब आप थकी हों या असहज महसूस करें, तो 'ना' कहना सीखें। यह आत्मसम्मान का प्रतीक है।
अपनी पहचान को खोजें
कभी आपने सोचा है, "मैं कौन हूँ?" अगर आपके जवाब में सिर्फ 'माँ', 'पत्नी', 'बहू' जैसे रिश्ते ही आते हैं, तो एक बार रुक कर अपने शौक और सपनों के बारे में सोचें। आप उन रिश्तों से कहीं ज्यादा हैं।
अपने शरीर और मन का ख्याल रखें
योग करें, व्यायाम करें, किताबें पढ़ें, संगीत सुनें या कुछ नया सीखें – ये सब आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।
खुलकर बात करें
जो बात मन में रह जाती है, वह घाव बन जाती है। अपने पति, बच्चों या दोस्तों से अपने मन की बात खुलकर साझा करें।
आत्मनिर्भर बनें
आर्थिक स्वतंत्रता स्त्री को आत्मविश्वास देती है। अगर आप घर पर हैं, तो घर से भी बहुत कुछ सीखा और कमाया जा सकता है – फ्रीलांसिंग, ट्यूशन, हैंडिक्राफ्ट्स, सोशल मीडिया कंटेंट, आदि।
मदद मांगना कमजोरी नहीं है
अगर आपको लग रहा है कि आप टूट रही हैं, तो काउंसलिंग लें या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। ये आत्मबल का प्रतीक है, कमजोरी का नहीं।
स्त्री केवल किसी की माँ, बेटी या पत्नी नहीं होती – वह एक संपूर्ण व्यक्तित्व होती है। अगर वह खुद को खो बैठी है, तो उसे खुद को फिर से पाना होगा। सबको कुछ देने से पहले खुद को देना ज़रूरी है। एक भरा हुआ मन ही दूसरों को सच्चा प्यार दे सकता है।
यदि आप सब कुछ देकर भी अंदर से खाली महसूस कर रही हैं – तो रुकिए, सोचिए, और खुद को प्राथमिकता दीजिए। तभी आप सच में जी पाएँगी, और दूसरों के लिए भी संबल बन पाएँगी।
हिमानी भारद्वाज
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