परिवार में बच्चों के कर्तव्य: संस्कार, ज़िम्मेदारी और भावनात्मक समझ की सही दिशा

 

परिवार में बच्चों के कर्तव्य: संस्कार, ज़िम्मेदारी और भावनात्मक समझ की सही दिशा

परिवार में बच्चों के कर्तव्य

संस्कार, ज़िम्मेदारी और भावनात्मक समझ की नींव

आज के समय में हम बच्चों के अधिकारों, उनकी आजादी, उनकी choices और उनकी mental health की बात ज़्यादा करने लगे हैं — जो बिल्कुल ज़रूरी भी है।
लेकिन इसी के साथ एक सवाल अक्सर पीछे छूट जाता है:

परिवार में बच्चों के कर्तव्य क्या होने चाहिए?

कर्तव्य का मतलब बोझ या दबाव नहीं होता।
कर्तव्य का अर्थ है —
ज़िम्मेदारी के साथ रिश्तों को निभाना।

परिवार बच्चे की पहली पाठशाला होती है,
जहाँ वह बोलना, समझना, महसूस करना और व्यवहार करना सीखता है।
अगर यहीं से कर्तव्यों की सही समझ मिल जाए,
तो बच्चा न सिर्फ अच्छा बेटा या बेटी बनता है,
बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनता है।


माता-पिता का सम्मान करना

परिवार में बच्चों का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है 
माता-पिता का सम्मान करना।

सम्मान का मतलब यह नहीं कि बच्चा डर में जिए या अपनी बात न रखे।
सम्मान का मतलब है उनकी बात ध्यान से सुनना ,उनकी मेहनत और त्याग को समझना ,असहमति होने पर भी भाषा और व्यवहार में शालीनता रखना

आज के समय में कई बच्चे कहते हैं,
“मेरी life है, मेरी choice है।”

यह बात सही है,
लेकिन यह भी उतना ही सच है कि
माता-पिता की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
किसी भी choice का हिस्सा नहीं होना चाहिए।

घर की ज़िम्मेदारियों में भागीदारी

घर सिर्फ माँ-बाप की ज़िम्मेदारी नहीं होता।
परिवार एक टीम की तरह चलता है।

बच्चों के छोटे-छोटे कर्तव्य जैसे अपना कमरा या सामान संभालना ,पढ़ाई की जगह साफ रखनl ,छोटे भाई-बहनों की मदद करना घर के नियमों का पालन करना

इनसे बच्चे में ज़िम्मेदारी, अनुशासन, आत्मनिर्भरता का विकास होता है।

जब बच्चे घर के कामों में शामिल होते हैं,
तो वे यह समझते हैं कि
हर चीज़ “अपने आप” नहीं होती।

परिवार के सदस्यों की भावनाओं को समझना

बच्चों का कर्तव्य केवल आज्ञा मानना नहीं है,
बल्कि परिवार के सदस्यों की भावनात्मक स्थिति को समझना भी है।

अगर माँ चुप है, पापा तनाव में हैं, दादी या दादा अकेलापन महसूस कर रहे हैं

तो थोड़ी सी संवेदनशीलता
परिवार के रिश्तों को गहराई देती है।

यह भावनात्मक समझ बच्चे को
आगे चलकर रिश्तों में mature बनाती है।

 ईमानदारी और सच्चाई की आदत डालना

परिवार वह सुरक्षित जगह होती है
जहाँ बच्चा सच बोलना सीखता है।

गलती करना इंसानी स्वभाव है,
लेकिन गलती छुपाना
डर और अपराधबोध को जन्म देता है।

बच्चों का कर्तव्य है सच बोलने की कोशिश करना

गलती स्वीकार करना ,उससे सीखने की इच्छा रखना ,ईमानदारी से बड़ा कोई संस्कार नहीं।

पढ़ाई और आत्म-विकास के प्रति ज़िम्मेदारी

पढ़ाई सिर्फ अच्छे marks लाने के लिए नहीं होती।
पढ़ाई का उद्देश्य है सोचने की क्षमता विकसित करना

  • सही और गलत में फर्क समझना ,आत्मविश्वास बढ़ाना

बच्चों का कर्तव्य है कि वे सीखने के प्रति ईमानदार रहें, मेहनत करें ,खुद की तुलना दूसरों से नहीं, खुद से करें

यह कर्तव्य सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि परिवार के सपनों के लिए भी होता है।

रिश्तों में सहयोग और संवाद

परिवार में मतभेद होना सामान्य है।
लेकिन बच्चों को यह सीखना ज़रूरी है कि

  • गुस्सा समस्या का हल नहीं ,संवाद समाधान का रास्ता है

बच्चों का कर्तव्य है कि वे बात-बात पर चिल्लाएँ नहीं,अपनी भावना शब्दों में व्यक्त करे,रिश्तों में अहंकार की जगह समझदारी रखें


बड़ों से सीखने की भावना

हर पीढ़ी अलग होती है।
सोच में अंतर होना स्वाभाविक है।

लेकिन बच्चों का कर्तव्य है कि बड़ों के अनुभव को महत्व दें

  • हर बात को “old thinking” कहकर न नकारे सीखने की भावना बनाए रखें ,यह आदत जीवन भर काम आती है।

कृतज्ञता (Gratitude) की भावना

बच्चों को यह समझना बहुत ज़रूरी है कि
जो सुविधाएँ उन्हें मिल रही हैं,
वे किसी की मेहनत का परिणाम हैं।

छोटे-छोटे “धन्यवाद”
रिश्तों को मजबूत बनाते हैं।

कृतज्ञता सिखाती है  विनम्रता, संतोष, भावनात्मक संतुलन

परिवार में बच्चों के कर्तव्य

उनकी आज़ादी छीनने के लिए नहीं होते,
बल्कि उन्हें ज़िम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनाने के लिए होते हैं।

जब बच्चे सम्मान करना सीखते हैं

  • भावनाओं को समझते हैं ,जिम्मेदारी निभाते हैं

तो वही बच्चे आगे चलकर समाज के लिए भी एक मजबूत आधार बनते हैं।

संस्कार सिखाए नहीं जाते, संस्कार जीए जाते हैं


हिमानी भारद्वाज


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