सबको खुश रखते-रखते खुद से दूर क्यों हो जाती हैं?


Indian Women and People-Pleasing सबको खुश रखते-रखते खुद से दूर क्यों हो जाती हैं?


“सब ठीक रखने की आदत, खुद को क्यों तोड़ देती है?”

क्या आपने कभी महसूस किया है कि
आप किसी बात से सहमत नहीं थीं,
फिर भी सिर हिला दिया?

दिल में आया— “मुझे यह नहीं करना चाहिए”
लेकिन डर लगा— “बुरा न मान जाए।”


और फिर बाद में—
थकान, frustration,
और खुद से यह शिकायत—
“मैं अपने लिए कभी क्यों नहीं बोल पाती?”

यह कोई छोटी आदत नहीं है।
यह एक psychological pattern है,
जिसे कहते हैं— People-Pleasing

भारतीय महिलाओं में यह बहुत आम है,
लेकिन बहुत कम पहचाना जाता है।


People-Pleasing क्या होता है?

People-pleasing का मतलब होता है

  • हर हाल में दूसरों को खुश रखना

  • Conflict से बचना

  • अपनी ज़रूरतों को दबाना

  • Approval को self-worth से जोड़ लेना

ऐसी महिला अक्सर “हाँ” कह देती है, जब कहना “ना” चाहिए

  • खुद की राय बदल लेती है

  • दूसरों की emotional ज़िम्मेदारी उठा लेती है

यह अच्छाई नहीं,
self-neglect का pattern है।


Indian Women और Approval Conditioning

भारतीय समाज में महिलाओं को सिखाया जाता है

  • अच्छी लड़की वही है जो adjust करे

  • ज़्यादा बोलने वाली लड़की “problematic” है

  • रिश्ते बचाने की ज़िम्मेदारी औरत की है

धीरे-धीरे यह messages एक belief बन जाते हैं—

“अगर मैं सबको खुश रखूँगी,
तभी मुझे accept किया जाएगा।”

यहीं से people-pleasing शुरू होता है।

“Good Girl Syndrome” की जड़ें

बहुत-सी महिलाओं ने बचपन में सुना

  • “तुम समझदार हो”

  • “तुम तो adjust कर लेती हो”

  • “तुमसे कोई complaint नहीं है”

बाहर से यह तारीफ लगती है,
लेकिन अंदर यह सिखाती है

“मेरी value तब है जब मैं किसी को inconvenience न दूँ।”


Hidden Signs of People-Pleasing

(जो अक्सर normal लगते हैं)

अगर आप इनमें खुद को पहचानती हैं,
तो यह ब्लॉग आपके लिए है:

  • आप “ना” कहने से पहले ही guilt महसूस करती हैं

  • आप हर बात explain करती रहती हैं

  • लोग नाराज़ न हों, इसका डर रहता है

  • अपनी ज़रूरतें हमेशा बाद में आती हैं

  • थकान के साथ resentment बढ़ता है

आप weak नहीं हैं। आप conditioned हैं।


People-Pleasing और Emotional Burnout का रिश्ता

People-pleasing सीधा burnout की ओर ले जाता है।

क्योंकि जब आप लगातार देती रहती हैं

  • बिना रुके adjust करती हैं

  • खुद को सुनती नहीं

तो एक समय बाद  emotions numb हो जाते हैं

  • गुस्सा अंदर ही अंदर भरता है

  • रिश्ते बोझ लगने लगते हैं

Burnout अचानक नहीं आता, यह over-giving का result होता है।


Trauma और People-Pleasing Connection

Psychology कहती है
people-pleasing अक्सर trauma response होता है।

Childhood Emotional Neglect

अगर बचपन में  emotions को ignore किया गया

  • प्यार conditional था

  • “अच्छा व्यवहार” = acceptance

तो बड़ा होकर व्यक्ति सीखता है

“अगर मैं खुश रखूँगा,
तो मुझे छोड़ा नहीं जाएगा।”


Fear of Abandonment

बहुत-सी महिलाएँ मना इसलिए नहीं कर पातीं क्योंकि

  • उन्हें डर लगता है कि रिश्ता टूट जाएगा

  • प्यार छिन जाएगा

यह डर real लगता है,
लेकिन यह past experiences से बना होता है।


People-Pleasing और रिश्ते

एक common गलतफहमी

“अगर मैं adjust करूँगी, रिश्ता बचेगा।”

Reality

  • ज्यादा adjust करने से respect कम होता है

  • resentment बढ़ता है

  • intimacy घटती है

जब आप खुद को दबाती हैं,
तो रिश्ता balanced नहीं रहता।

Healthy रिश्ता वह होता है
जहाँ दोनों अपनी ज़रूरतें रख सकें।


People-Pleasing और Self-Worth

People-pleasers अक्सर कहते हैं—
“मुझे अच्छा लगना चाहिए।”

लेकिन असल में वे कहना चाहते हैं—
“मुझे reject नहीं होना चाहिए।”

जब self-worth बाहर से आती है,
तो approval ज़रूरी लगने लगता है।


Pattern तोड़ना कैसे शुरू करें?

Awareness

पहला कदम है पहचानना—
“मैं यह अपने डर से कर रही हूँ या choice से?”

Discomfort सहना सीखें

हर बार लोग खुश नहीं होंगे।
और यह ठीक है

Over-Explaining बंद करें

आपको हर बात justify करने की ज़रूरत नहीं।

“मैं अभी नहीं कर पाऊँगी”
भी पूरा वाक्य है।

Self-Validation Practice

खुद से पूछें—
“अगर कोई और यह कर रहा होता,
तो क्या मैं उसे गलत कहती?”

Small Boundaries से शुरुआत

हर जगह बड़ा स्टैंड लेने की ज़रूरत नहीं।
छोटे “ना” बहुत powerful होते हैं।

People-Pleasing छोड़ने का मतलब क्या नहीं है?

❌ इसका मतलब rude बनना नहीं
❌ रिश्ते तोड़ना नहीं
❌ insensitive होना नहीं

✔️ इसका मतलब है
खुद को भी उतनी ही value देना
जितनी आप दूसरों को देती हैं।

Counseling sessions में
बहुत-सी महिलाएँ कहती हैं—

  • “मुझे सब manage करना पड़ता है”

  • “अगर मैं नहीं करूँगी, तो कौन करेगा?”

Therapy में वे समझती हैं कि—

  • हर emotion उनकी ज़िम्मेदारी नहीं

  • प्यार sacrifice से prove नहीं होता

  • self-worth approval से अलग है

Counseling उन्हें
safe तरीके से people-pleasing pattern
से बाहर निकलना सिखाती है।


Healing का सच

Healing का मतलब
अचानक बदल जाना नहीं।

Healing का मतलब—

  • डर के बावजूद सच बोलना

  • guilt के साथ भी boundary रखना

  • और खुद को धीरे-धीरे चुनना

“सबको खुश करना आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है”

अगर आपने पूरी ज़िंदगी
दूसरों की expectations निभाई हैं,
तो अब खुद को चुनना
गलत नहीं है।

आपका आराम मायने रखता है।
आपकी आवाज़ मायने रखती है।
और आपकी ज़रूरतें भी valid हैं।

क्योंकि
जो खुद को खोकर सबको खुश रखता है,
वह आखिर में किसी का नहीं रह जाता —
खुद का भी नहीं।


अगर इस ब्लॉग की बातें
आपको आपकी ही कहानी जैसी लगी हों,
और आपको महसूस हो कि
people-pleasing की यह आदत
आपको थका रही है—

तो याद रखिए,
आपको यह बदलाव अकेले नहीं करना है।

Counseling एक सुरक्षित जगह हो सकती है
जहाँ बिना जजमेंट
आप खुद को समझना और संभालना सीख सकती हैं।

अगर आप अपने लिए
counseling support लेना चाहें,
तो हमसे संपर्क कर सकती हैं।

आपकी mental well-being ज़रूरी है। 


हिमानी भारद्वाज

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